Hemlata

Mehnat kee raah

After losing her father at a young age, she had to work while completing her own education, in order to not give up ger dream of higher education.

जिन्दगी खुशियों के आगमन पर जितनी हसीन नजर आती है, दु:खों से टकराने पर उतनी ही बोझिल भी हो जाती है । व्यक्ति या तो ग़मों से अपने आप को सोने की तरह निखार लेता है या खुद उसमें डूब जाता है ।
मेरी कहानी उस पल से शुरू होती है जब किशोरावस्था की दहलीज पर एक युवती अपने स्वर्णिम भविष्य की चाह में किताबों में पूरी तरह से खोयी हुई थी, स्वप्न था -बस एक उच्च प्रशासनिक पद की प्राप्ति का । पर उसकी किस्मत में भगवान संघर्ष की लंबी कहानी लिख रहा था ।

अचानक उसके पिताजी का स्वर्गावास हो जाता है। धन के नाम पर उसके पास होता है अब तक प्राप्त की गई विद्या और डिग्रियां। यही से उसकी मासूमियत अनायास ही परिपक्वता की ओर बढ़ जाती है ।
उसके परिवार वाले उसकी शादी कर देना चाहते थे पर मां के साथ के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उसने, उसकी मां और छोटे भाईयों ने यहीं से जिंदगी, रिश्तेदारी और दोस्तों को करीब से जाना ।
वित्तीय स्थिति को संभालने के लिए उसने कॉलेज में पढ़ाया, ट्यूशन पढ़ाई और खुद की पढ़ाई भी करने की कोशिश की ।

इन विपरीत परिस्थितियों में भी उसने शिक्षा के उच्च स्तर को स्वर्ण पदकों के साथ प्राप्त किया । यद्यपि प्रशासनिक अधिकारी का पद प्राप्त न कर पाने की कसक आज भी उसके ख्वाबों में है पर वह युवती आज बहुत ही अच्छे सरकारी पद पर कार्य कर रही है ।
सलाम है एक माँ को जो खुद ज्यादा पढ़ाई ना करके भी उसके मायने जानती थी, अपनी बच्ची को आत्मनिर्भर बनाना चाहती थी । सलाम है उस भाई को जो छोटा होकर भी पिता की कमी को पूरी करने की कोशिश आज भी कर रहा है।


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